परम पावन दलाई लामा का कार्यालय

परम पावन दलाई लामा का कार्यालय, जो तिब्बती भाषा में गदेन फोडंग लबरंग यिगछ़ंग के नाम से जाना जाता है, परम पावन दलाई लामा का निजी कार्यालय है। यह परम पावन जी का सचिवालय है और व्यापक तौर पर परम पावन जी से जुड़े सभी मामलों के लिए उत्तरदायी है तथा उनका प्रतिनिधित्व करता है ।  

परम पावन दलाई लामा के कार्यालय की प्रमुख ज़िम्मेदारियाँ हैं –

1 परम पावन दलाई लामा के कार्यक्रमों का आयोजन जिनमें उनसे भेंट तथा भारत और विश्व के विभिन्न भागों की यात्रा भी शामिल है।

2 परम पावन दलाई लामा की ओर से सभी पत्राचार की देख रेख।

जब परम पावन धर्मशाला में होते हैं तो उनके कार्यक्रम में साधारणतया प्रातःकाल के  धार्मिक अभ्यास तथा अध्ययन शामिल होते हैं। दोपहर में परम पावन तिब्बती तथा गैर तिब्बतियों को दर्शन देते हैं। परम पावन की कुछ प्रशासनिक ज़िम्मेदारियाँ भी हैं जैसे कि तिब्बती मंत्री परिषद तथा वरिष्ठ प्रशासनिक कर्मचारी से भेंट।

यद्यपि प्रारंभिक वर्षों में परम पावन के कार्यक्रम लचीले और धीमे गति वाले होते थे पर पिछले कुछ वर्षों में उनकी यात्राओं तथा धर्म प्रवचनों के कारण खास कर पूरे विश्व में उनकी व्यस्तता बहुत बढ़ गई है। इस कारण दुर्भाग्यवश परम पावन दलाई लामा के कार्यालय के लिए परम पावन जी के निजी दर्शन के कार्यक्रम को तय करना असंभव हो गया है। परम पावन जी से भेंट के सबसे अच्छे अवसर उस समय हैं जब वे समय समय पर भारत में धर्मशाला अथवा अन्य जगहों पर सार्वजनिक धर्म प्रवचन देते हैं । इन प्रवचनों की सूची के लिए वेब साइट के कार्यक्रम भाग को देखें।

परम पावन जी से धर्मशाला में व्यक्तिगत भेंट के अवसर को दो वर्गों में बाँटा जा सकता हैः अ) निजी दर्शन ब) मीड़िया साक्षात्कार। परन्तु, चूँकि परम पावन जी की कई सार्वजनिक व्यस्तताएँ होती है जिनमें लंबी यात्राएँ और धर्म प्रवचन होते हैं जो उनका अधिकांश समय लेते हैं, इसलिए उनके व्यक्तिगत भेंट के लिए बहुत कम समय बच पाता है।


 

नवीनतम समाचार

परम पावन दलाई लामा की पर्यावरण और सुख पर व्याख्यान देने हेतु मध्य प्रदेश की यात्रा
19 मार्च 2017
भारत को गांवों के विकास पर ध्यान देना चाहिए: दलाई लामा भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत, १९ मार्च २०१७ (पीटीआई) - भारत को समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए गांवों के विकास पर ध्यान देना चाहिए, तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने रविवार के दिन कहा "भारत की समृद्धि बड़े शहरों के विकास के बजाय गांवों के विकास पर निर्भर करती है। अतः विकास की यात्रा देश के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रारंभ होनी चाहिए," दलाई लामा ने मध्य प्रदेश के देवास जिले के तुरनल गांव में एक सभा को बताया।

नव नालंदा महाविहार की यात्रा और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का दूसरा दिन
March 18th 2017

२१वीं सदी में बौद्ध धर्म की प्रासंगिकता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन
March 17th 2017

धर्मशाला में सहस्र भुजा अवलोकितेश्वर अभिषेक
March 14th 2017

'भावनाक्रम' और 'बोधिसत्व के ३७ अभ्यास' पर प्रवचन
March 13th 2017

खोजें