तिब्बती युवाओं के लिए प्रवचन का दूसरा दिन

6 जून 2017

थेगछेन छोलिंग, धर्मशाला, हि. प्र., भारत, ६ जून २०१७ - तिब्बती युवाओं के लिए प्रवचन के दूसरे दिन के मंगलमय प्रारंभ हेतु परम पावन दलाई लामा ने वहाँ आए लगभग ६० थाई भिक्षुओं के समूह से मंङल सुत्त का पाठ करने का अनुरोध किया।
 
अपर टीसीवी के ७, ८, ९ कक्षा के छात्रों ने स्वरों और व्यंजनों पर चर्चा करते हुए एक ऊर्जावान शास्त्रार्थ प्रस्तुत किया। उनके उपरांत टीसीवी कर्मचारियों ने विज्ञान के प्रश्नों पर शास्त्रार्थ किया, जिसे परम पावन ने ध्यान से सुना।


२८०० प्राइमरी तिब्बती छात्रों और ७१ देशों के १५०० विदेशियों सहित ८,२०० संख्या में श्रोताओं को संबोधित करते हुए, परम पावन ने नालंदा परम्परा, इसके आंतरिक मूल्यों और समूची मानवता की सेवा के लिए एक निधि के रूप में इसके द्वारा तर्क तथा कारण पर बल देने की बात की।

"यह प्रयास करने योग्य है," उन्होंने कहा। "हम यहाँ शांति की अनुभूति कर सकते हैं, पर अन्य स्थानों पर जानलेवा हिंसा फूट पड़ी है। ब्रिटेन में हाल ही में बर्बर हमले हुए हैं और अन्य स्थानों पर लाखों भुखमरी के कगार पर हैं। इन सभी संकटों में मनुष्य शामिल हैं। हमें अपने आप को स्मरण कराने की आवश्यकता है कि आधारभूत मानव प्रकृति करुणाशील है। बच्चों के रूप में हम स्वतंत्र, मैत्रीपूर्ण और हंसी खुशी से भरे होते हैं तो हम बड़े होकर क्योंकर आक्रामक और हिंसक हो जाते हैं?
 
"यह अच्छा होगा यदि हम सौहार्दता और प्रेम के विचार का प्रसार कर सकें और उन कार्यों को सीमित कर सकें जिनमें करुणा का अभाव है। जिस तरह भारत को अहिंसा की भूमि के रूप में जाना जाता है, वैसे ही हम तिब्बती अनावश्यक रूप से कीड़ों जैसे जानवरों को नुकसान न पहुँचाने की भावना से पले बढे हैं। केन्द्रीय तिब्बती प्रशासन के एक पूर्व अधिकारी ने मुझे बताया कि उसे संयुक्त राज्य अमरीका में विश्वविद्यालय के रसोई घर में सब्जियों की सफाई का काम मिला। उसे जो भी कीड़े मकोड़े मिलते वह उसे एक कांच के बर्तन में रख देता था और अपने कार्य की समाप्ति पर उन्हें बाहर छोड़ देता था। उसके सहकर्मियों ने देखा और उससे पूछा कि वह क्या कर रहा था। उसने समझाया कि तिब्बती संस्कृति में लोग छोटे प्राणियों के जीवन को बनाए रखने का प्रयास करते हैं और शीघ्र ही उसने देखा कि अन्य भी उसके उदाहरण का पालन करना प्रारंभ कर चुके हैं।"


परम पावन ने यह भी उल्लेख किया कि एक अमरीकी, जो अमरीका में १००० तिब्बतियों को पुनर्स्थापित करने की परियोजना से जुड़ा है, ने उन्हें बताया कि उसने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि उसे लगा कि तिब्बतियों का समाज में एक सकारात्मक योगदान होगा। परन्तु उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वे सावधान न रहें तो अपनी प्रतिष्ठा खो सकते हैं।
 
उन्होंने दोहराया कि चूंकि बौद्ध आंतरिक विज्ञान न केवल अज्ञान पर काबू पाने, अपितु अनियंत्रित चित्त को काबू में करने और रूपांतरित करने से संबंधित है इसका व्यावहारिक मूल्य है। उन्होंने ‘त्रि श्रद्धा प्रकाश: नालंदा के सत्रह महान आचार्यों की स्तुति' की पुष्पिका से उद्धृत किया:
 
"वर्तमान समय में, जब साधारण विश्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत उन्नति हुई है, पर हम अपने व्यस्त जीवन की हलचल से भी विचलित होते हैं तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम में से जो बुद्ध का अनुसरण करते हैं हमें उनके शिक्षण के ज्ञान के आधार पर आस्था रखनी चाहिए। अतः हमें निष्पक्ष और जिज्ञासु मस्तिष्क से उसके कारणों की जांच करनी चाहिए, इसका निकट से विश्लेषण करना चाहिए।"
 
फिर उन्होंने गहन तथा व्यापक शिक्षाओं की वंशावली के आचार्यों के गुणों का स्पष्टीकरण करते हुए स्तुति के छंदों का पाठ किया।
 
तिब्बती छात्रों के कई प्रश्नों में, एक युवती ने कहा कि कभी-कभी ऐसा होता है कि आप उस जगह का स्वप्न देखते हैं जहाँ आप पहले नहीं गए और जब बाद में आप वहाँ जाते हैं तो उसे पहचान जाते हैं। वह जानना चाहती थी कि क्या हो रहा है। परम पावन ने समझाया कि लोगों के विभिन्न स्वप्न के अनुभव को उनके विशेष शारीरिक स्वभाव से जोड़ा जा सकता है।


"ऐसे लोग हैं जो स्पष्ट स्वप्न देखते हैं जिसमें वे भविष्य देखते हैं। मेरे ऐसे मित्र हैं जिन्होंने यहां धर्मशाला में रहने का सपना देखा था, जबकि वे तब तिब्बत में थे और जब वे यहाँ आए तो उन्होंने इसे पहचाना। ऐसा प्रतीत होता है कि सूक्ष्म चित्त में भविष्य को देखने की शक्ति है।
 
"जब मैं जागा हुआ हूँ तो मुझे विगत जीवनों के बारे में कुछ याद नहीं होता, पर अपने सपनों में, मैं स्मरण करता हूँ। मुझे प्राचीन मिस्र में एक बंदी होने और जंजीरों में बाँध कर राजा के सामने लाए जाने की एक स्मृति है। वे अपने उच्च सिंहासन पर आसीन थे और उन्होंने मेरी ओर देखते हुए आदेश दिया कि मुझे मुक्त कर दिया जाए। मैंने अतीत के भारतीय और तिब्बती आचार्यों के साथ होने के भी स्वप्न देखे हैं।
 
"मेरी माँ ने मुझसे कहा था कि जब मैं छोटा था तो मुझे स्पष्ट रूप से विगत जीवन की स्मृतियाँ थीं। उन्होंने मुझे यह भी बताया कि जिस दिन खोज पार्टी हमारे घर आई थी, मैं उत्साहित था। जब केऊछंग रिनपोछे आए तो जाहिर तौर पर मैंने उन्हें और उनके गले की जप माला को पहचान लिया। मैं यह कहते हुए कि वह माला मेरी थी और उनसे मुझे देने के लिए कहते हुए उस माला को छेड़ता रहा।"
 
परम पावन ने पूछा कि क्या उन विद्यार्थियों में से कोई ऐसा है जो यह पहचानने में सक्षम है कि जब वह स्वप्नावस्था में होते हैं तो वे जान सकते हैं कि वे स्वप्न देख रहे थे। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसा करने के लिए खुद को प्रेरित करने के उपाय हैं और यह आध्यात्मिक अभ्यास करने का एक प्रबल अवसर है।
 
तिब्बती युवाओं के लिए प्रवचन कल प्रातः बना रहेगा, जिस दौरान परम पावन ने बोधिचित्तोत्पाद के समारोह के आयोजन का वादा किया है।

 

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